चुनाव का शोर बैठ चुका है. नतीजे आ चुके हैं. जीत-हार का हिसाब लग गया. नीतीश जी की कुर्सी पक्की मानी जा रही है, तेजस्वी यादव अपनी-अपनी तैयारी में हैं. लेकिन इस पूरे खेल से बाहर एक कुनबा है प्रवासी मजदूर. जिनका जीवन चुनावी मौसम से ना शुरू होता है, ना खत्म होता है.
समस्तीपुर में तस्वीर वही है, जो हर चुनाव के बाद दिखती है.
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वोट देकर लौटे थे उम्मीद लेकर… और अब काम की तलाश में फिर से परदेस जाने को मजबूर!ट्रेनों में ठूंस-ठूंस कर भीड़ – खिड़की से घुसते यात्री, बाथरूम में खड़े होकर सफर
स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस समस्तीपुर स्टेशन पर लगी तो लगा जैसे पूरा डिब्बा पहले से ही हाउसफुल था. जनरल में भीड़… स्लीपर में भीड़… गेट पर बैठे लोग… खिड़की से अंदर जाते यात्री… और बाथरूम में बैग टांगकर सफर करते प्रवासी मजदूर. स्टेशन पर खड़े लोग देखकर पूछ रहे थे